अब फर्क नहीं पड़ता..."

 Shayari:

अब फर्क नहीं पड़ता तू किसके साथ है, क्योंकि मैं अब तुझे याद भी नहीं करता। तेरे झूठ से टूटा था मैं कभी, अब सच भी कह दे, तो भरोसा नहीं करता।



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उम्मीद और सवेरा