बारिश में भी तू नहीं आया...

कहते हैं बारिश सुकून देती है...
पर जब यादें साथ भीगती हैं, तो हर बूंद बस एक आँसू बन जाती है।

Shayari:

इस बार भीगी है हर चीज़ बारिश में, बस एक तेरी यादें थीं जो पहले से ही नम थीं। छत भीगी, ज़मीन भी भीगी, पर जो दिल में तू था — वो हिस्सा आज भी सूखा रह गया...

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खामोशियों की गहराई

 शब्द कम थे, एहसास बहुत थे, दिल में छुपे कुछ राज़ बहुत थे। वो पूछते रहे हाल मेरे मुस्कुरा कर, और हम थे कि खामोशियों में भी आवाज़ बहुत थे।...