तू कहता था बारिश में भीगना तुझे बहुत पसंद है,
अब हर बारिश में तुझे ढूँढता हूँ, और खुद भीगता हूँ।
कभी ये बूंदें तुझसे बातें करती थीं,
अब बस चुपचाप मेरे चेहरे से फिसल जाती हैं।
शब्द कम थे, एहसास बहुत थे, दिल में छुपे कुछ राज़ बहुत थे। वो पूछते रहे हाल मेरे मुस्कुरा कर, और हम थे कि खामोशियों में भी आवाज़ बहुत थे।...
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