जगन्नाथ की रथ यात्रा – और ज़मीन की पहली सांस”

 जगन्नाथ की रथ यात्रा – और ज़मीन की पहली सांस”

जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल सिर्फ मंदिर से बाहर आने की घटना नहीं है —
यह है हर आत्मा के भीतर के रास्ते को जगाने की पुकार।

वहीं आषाढ़ी बीज है एक किसान के भरोसे की पहली सांस —
जो मिट्टी में मिलकर ज़िंदगी की शुरुआत करता है।

दोनों मिलकर कहते हैं —
“चलो, शुरुआत करें — अंदर से भी और बाहर से भी।”


Shayari 

"रथ चला है प्रेम की राहों पर,
हर मोड़ पे बिखरी है आस की नजर।
कंधों पे नहीं, दिलों पर चढ़ा रथ,
जगन्नाथ की लीला है अद्भुत और अथ।"

🌱
"बीज गिरा नहीं, बोया गया है यकीन से,
हर पंक्ति में लिखा है एक ख्वाब महीन से।
आषाढ़ी बीज है सिर्फ़ मौसम नहीं,
ये शुरुआत है उस कहानी की जो दिल से जमीं तक जाती है कहीं।"


No comments:

Post a Comment

खामोशियों की गहराई

 शब्द कम थे, एहसास बहुत थे, दिल में छुपे कुछ राज़ बहुत थे। वो पूछते रहे हाल मेरे मुस्कुरा कर, और हम थे कि खामोशियों में भी आवाज़ बहुत थे।...