सुबह की खामोशी और तेरी याद…

 

हर सुबह सूरज की किरणें तो हर किसी के आंगन में उतरती हैं,
लेकिन कुछ सुबहें ऐसी होती हैं —
जहाँ रौशनी तो होती है… मगर तुम नहीं होते…


Shayari:
"तेरी यादों की चाय लिए बैठा हूँ आज भी,
सुबह की पहली सांस में तुझे ही महसूस करता हूँ…
जैसे हर धड़कन कहती हो,
'एक बार और लौट आ… सुबह फिर से तेरी मुस्कान से शुरू हो…'"



इस Shayari को लिखते हुए ऐसा लगा जैसे सुबह भी ठहर गई हो,
और तुम्हारी यादों की परछाई हर रौशनी से भारी हो गई हो।
काश… Good Morning की पहली लाइन तुम्हारे “सुभप्रभात” से शुरू होती —
तो हर दिन त्यौहार लगता…

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