वो तो अब भी ज़िंदा है… मेरी हर ख़ामोशी में…"

 

कुछ लोग हमारी ज़िंदगी से चले जाते हैं,
लेकिन हमारी साँसों से नहीं…
वो हर ख़ामोशी में छुपे रहते हैं — एक टीस बनकर, एक आदत बनकर…


Shayari:
"रूठा नहीं वो, बस ख़ामोश हो गया है,
अब मेरी तन्हाई में ही कहीं सो गया है…
मैं आज भी उसे वही नाम से पुकारता हूँ,
जो कभी सिर्फ मैं कहा करता था…"



ये शायरी उन लोगों के लिए है,
जिन्होंने किसी को खोया नहीं — बस छुपा लिया दिल के किसी कोने में…
जहाँ दर्द बोलता नहीं, बस महसूस होता है…
और वो इंसान हर बार आँखें बंद करते ही सामने आ जाता है।

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खामोशियों की गहराई

 शब्द कम थे, एहसास बहुत थे, दिल में छुपे कुछ राज़ बहुत थे। वो पूछते रहे हाल मेरे मुस्कुरा कर, और हम थे कि खामोशियों में भी आवाज़ बहुत थे।...