भीगती खिड़कियाँ और दिल की तन्हाई”

नमस्कार दोस्तों,

कहते हैं बारिश सब कुछ धो देती है...
पर कुछ यादें, कुछ जज़्बात — वो सिर्फ भीगते हैं, मिटते नहीं।



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खामोशियों की गहराई

 शब्द कम थे, एहसास बहुत थे, दिल में छुपे कुछ राज़ बहुत थे। वो पूछते रहे हाल मेरे मुस्कुरा कर, और हम थे कि खामोशियों में भी आवाज़ बहुत थे।...